संख्याओं को अरेबिक न्यूमरल क्यों कहते हैं?| Fact#1
चूंकि नौवीं सदी तक ज्यादातर भारतीय ज्ञान दुनिया को अरब देशों से मिलता था। अतः यह मान लिया गया कि ये संख्याएं अरबी है। अरबी में इन अंकों को 'हिंदसा' अर्थात भारतीय अंक कहते थे।
नमस्कार दोस्तों,
दोस्तों आपका स्वागत है हमारे ब्लॉग पर। दोस्तों आज हम जानने वाले हैं कि जिन संख्याओं का हम इतना उपयोग करते हैं और जो हमारे बहुत काम आती है उन संख्याओं (0,1,2,3,4....9) को अरेबिक न्यूमरल क्यों कहते हैं? और दोस्तों ये है हमारा आज का Fact नंबर-1। जी हाँ दोस्तों, ये हमारा आज का Fact #1 है और आज हम इसी तथ्य पर चर्चा करने वाले हैं।
जी हाँ दोस्तों आज हम इसी टॉपिक पर बात करने वाले हैं लेकिन अभी तक आपने हमारे ब्लॉग को फॉलॉ नहीं किया तो अभी फॉलॉ करें।
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तो ये जानने के लिए देखते रहिए- MD-LLP(MD-LEARNING LOGICAL POINTS)
1.भारत में अंको का निर्धारण -
दोस्तों इन संख्याओं को गलती से अरेबिक अंक कहा गया और यह परंपरा के रूप में चलता गया। दोस्तों ये अंक अरेबिक अंक न होकर भारतीय अंक हैं क्योंकि इन अंको का अविष्कार या निर्धारण प्राचीन भारत में हुआ था।
2.अरेबिक न्यूमरल क्यों कहा जाता है? -
चूंकि दोस्तों नौवीं सदी तक ज्यादातर भारतीय ज्ञान दुनियां को अरब देशों से मिलता था। अतः यह मान लिया गया कि ये संख्याएं अरबी है। अरबी में इन अंकों को 'हिंदसा' अर्थात भारतीय अंक कहते थे।
इसका एक और कारण हो सकता है कि इस अंक पद्धति का इस्तेमाल ईस्वी सन् 830 के आस-पास एक फ़ारसी गणितज्ञ अल-ख्वारिज्मी ने किया था और उसने यह जानकारी अरब देशों से प्राप्त की थी, इसलिए उन्होंने इन्हें अरबी अंक लिखा।
3.रोमन पद्धति का अधिग्रहण -
अरबी में इन अंकों को 'हिंदसा' अर्थात भारतीय अंक कहा जाता था। धीरे-धीरे इस पद्धति ने रोमन पद्धति कि जगह ले ली। रोमन अंक पद्धति में संख्याएं लिखने के लिए बहुत ज्यादा जगह चाहिये और उन्हें पढना भी बहुत कठिन होता है।
प्राचीन भारतीय गणितज्ञों ने करीब 2000 साल पहले दासमिक पद्धति का अविष्कार कर दिया था।


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